रौप्य भस्म

द्रव्य – शुध्द चांदी के पतरे २० तोले और शुध्द हरताल ४० तोले |

प्रथम विधि– हरताल को सत्यानाशी के रस में खरलकर चांदी के पतरों पर दोनों ओर लेपकर दें लेप सुखने पर सम्पुट कर एक सेर कण्डों की अग्नि देवें | फिर निकार १० तोले हरताल का लेप कर दे | उसे सुखा सम्पूट कर १ सेर कण्डों की अग्नि देवें तीसरी बार 5 तोले हरताल और 2 सेर गोबरी लेवें | फिर ४ से १० वे पुट से अग्नि थोडी-थोडी बढावे भस्म अच्छी बन जाये, पर गुलाब के फुलों के स्वरस में पीस टिकिया बना सुखा बचे हुये गुलाब के गाढे कल्क के भीतर रख शराव सम्पुट कर 5 सेर कण्डो की अग्नि दें | ऐसे 3 पूट देने सें मुलायम भस्म बन जाती है |

व्दितीय विधि – शुध्द चांदी के 50 तोले मोटे कागज जैसे पतरो के २-२ इन्न्ज के टुकडे करें फिर एक परात में कोयलों की अग्नि पर उन टुकडों को फैला दें | सब टुकडे न रख सके तो थोडे-थोडे रखें अच्छी तरह गरम होने पर चिमटे से एक-एक पतरे को उठा-उठा छोटी कटेली के रस बुझाते जायेंइस तरह सब पतरों को २१ समय गरम करके बुझावें | फिर एक बडी हांडी के उपर का तीसरा हिस्सा तोडकर  उसे कण्डो लगभग २ सेर से भर देवें कण्डो पर कटेली का चूर्ण जो रस निचोडने के समय बचा है | उसकी १ त्र्ज की तह करें इस पर चांदी के पतरे फैलावे उपर और कटेली चूर्ण डालें उस पर और चांदी के टुकडे रखें इस तरह सब टुकडे २-४ तह में रख सबके उपर १ त्र्ज या अधिक मोटी तह कटेली चूर्ण की रखें | फिर उपर लगभग  २ सेर कण्डे जमाकर अग्नि लगा देवें | स्वांग शीतल होने पर चांदी के पतरो को निकाल लेवें इस तरह छोटी कटेली के चूर्ण के भीतर रखकर ५ बार अग्नि  देने से पतरे सरलता से टूट जाते है  | पश्चात पतरो को कूटकर चूर्ण कर लें उन्हे कटेली के रस में शाम तक खरल कर शराव में भर लेवें | उसका साधारण सम्पुटकर रात्रि को 2 सेर उपलों की अग्नि में रख देवें | दूसरे दिन पुनः कटेली के रस में घोटें १० पूट हो जाने पर उपले थोडे-थोडे बढाते जायें |२० पूट होने के पष्चात उपले ५-१० और ५ सेर तक बढावे इस तरह २८ पूट देवें  | अन्तिम पुट के समय छोटी-छोटी टिकिया बना सूर्य के ताप में सुखा सम्पुट कर अग्नि देवें | यह भस्म हल्के मैले लाल रडंग की मुलायम बनती है ५० तोले चांदी की ५६ तोले भस्म बनती है |

सुचना – सुवर्ण और रौप्य जब तक कच्चे हों तब तक ज्यादा तेज अग्नि नहीं देनी चाहिये | अन्यथा पुनः जीवित हो जाते है या कठोर बन जाते है |

मात्रा और उपयोग – प्रथम खण्ड में लिखे अनुसार |

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