मनःशीला भस्म

मनःशीला भस्म

विधि-

2 तोले शुध्द मैनसिल को थूहर के पत्तों के रस में 12 घण्टों  तक खरलकर टिकिया बनाकर सुखावें | फिर दो षरावों  में कलई चूने के भीतर रख सम्पुट कर 3 कपडमिटटी करके 5 सिरके 5 सेर कण्डों के भीतर फुंक देवें | स्वाडग्ंा षीतल होने पर स्मपुट निकाल कर खोले, चुने का रंग पीला हो जाता है | और मैनसिल भस्म सफेद हो जाती है |

मात्रा –

1/2 से 1 चावल भर तक मिश्री के साथ देवें |

उपयोग –

यह भस्म विशमज्वर और कफप्रधान ज्वर को दूर करती है |

मैनसिल के भीतर सोमल होने से इस भस्म को सोमल का सौम्य कल्प कहा जायेगंा | जिन-जिन रोगिंयो को सोमल देनें | में भीती रहती हो, और सोमल देने की आवश्यकता हो उन रोगियों को यह भस्म अमृत के समान हितकारक होती है | वातविकार उपदंष शुल कास श्वास क्षयज्वर तथा कीटाणुजनित विविध व्याधिंयो में यह निर्भयतापुर्वक दी जाती है |

 

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