मधुकादि कषाय

(प्रथम विधि)

द्रव्य- मुलहठी अमलतासका गूदा मुनक्का कुटकी हरड बहेडा आॅंवला परवल के पत्ते समभाग लें|

विधि-

सबको मिलाकर जौकूट कर लें |

मात्रा –

१-१ तोले का क्वाथ दिन में २ बार देवें या केवल रात्री को सोने के समय देवें |

उपयोग –

यह कषाय आमपाचक विरेचन और ज्वरघ्न है मलावरोधसह जीर्ण ज्वर को दूर करता है वातज पित्तज और कफज तीनों प्रकृतिवालों के लिए यह हितावह है ज्वर जीर्ण होने पर निर्बल आंतो वालों को बहुधा मलावरोध रहता है और मलावरोध के हेतु से ज्वर जल्दी नहीं छोडता फिर कफप्रकोप अग्निमादय मूत्र में पीलापन जिल्हा पर मल की तह जमना किसी को अपचन अरुचि उदरवात नेत्रदाह आदि लक्षण उपस्थित होते है इस अवस्था में यह कषाय अति हितकारक है |

 

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