दाव्र्यादि क्वाथ

द्रव्य- दारुहल्दी देवदारु इन्द्रजौ मजीठ अमलतास और पाढ 3-3 तोले कपूर काचरी खस पीपल चिरायता गजपीपल वनप्सा तगर पदमाख काकडासिंगी धनियां सोंठ नागरमोथा निशोथ वज्रदन्ती पिया बांसा हरड छोटी कटेली नाय कुटकी जवासा निमगिलोय और पुष्कर मूल ये प्रत्येक 1-1 तोला खूबकला त्रायमाण सप्तपर्ण की छाल और काल मेघ 5-5 तोले  |

विधि –

सबको मिलाकर जौकूट चूर्ण करंे |

मात्रा-

1-1 तोले का क्वाथ कर दिन में 2 बार पिलावें |

उपयोग-

यह क्वाथ विषमज्वर में लिए अति लाभदायक है सामज्वर में आम विष और किटाणुओं को जलाकर नूतन ज्वर को दूर कर देता है | जीर्ण ज्वर में यह सर्वज्वरहर लोह के साथ अनुपान रुप से दिया जाता है |

इसका उपयोग अनेक वर्षाे से वैदय राज श्री रामचन्द्रजी ने किया था हजारों रोगियों को दिया गया है कभी निश्फल नही हुआ |

 

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