तुत्थ खर्पर भस्म

तुत्थ खर्पर भस्म

द्रव्य – जसद का फुला  अथवा भस्म ९८ तोले और नीला थोथा २ तोले |

विधि –दोनांे को मिला आंवलो के स्वरस में खरलकर गोला बनावें फिर शराव सम्पूट कर अग्नि में फुंक दें | स्वांगशीतल होने पर पुनः २ तोले नीलाथोथा मिलाकर उपरोक्त विधि से खरलकर दो सेर गोबरी में फुंक देवें | इस तरह ९ पुट देवें | दसवीं बार बिना तूतिया मिलाये आवलो के स्वरस में ३ दिन तक घोट २-२ तोले की टिकीया बनाकर पुरा गजपुट देवें स्वांग शीतल  होने, पर निकाल कर पीस दें |

वक्तव्य-

इस भस्म को 1 वर्शं से पूर्व व्यवहार करने, से वांति भ्रम उन्माद आदि उपद्रव होते है | अतः भस्म  को चीनी या मृतिका पात्र में डाल पृथ्वी में 1 हाथ गहरे गडढे में ऐसे स्थान पर गाडे जो सदा सूर्य चन्द्र की रष्मियों से प्रभावित रहता है 40 दिन पीछे निकाल शिशी में भरकें रख ले, फिर 1 वर्ष पूरा हो जाने पर प्रयोग में लेवें प्राचीन शास्त्रोक्त खर्पर के अभाव में नेत्रांजन में इसका प्रयोग अत्यन्त गुणकारी है | इस प्रयोग को यषद भस्म के स्थान पर स्वर्णमालिनी वसंत के प्रयोग में मिलाने परवह चमत्कारी प्रभाव करता है | इसके अतिरीक्त यह भस्म कठिन और दुःसाध्य व्रण ऱोगो में खाने लगाने के लिये भी अति हितावह सिध्द हुई है |

खनिज द्रव्य विशेष करवेल्लक और केलेमेना प्रेप्रेटा को भी सच्चे खर्पर के अभाव में सुवर्णमालिनी वसन्त आदि रसांे में प्रयुक्त कर सकते है | वे भी जीर्ण ज्वर जीर्ण अतिसार और संग्रहणी के नाशक होने से युक्ती संषोधक है |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *