अभ्रक भस्म

अभ्रक भस्म

विधि–

धान्याभ्रक ४० तोले को पीले फूल  वाले भांगरे के रस में रोज १-१ घण्टे घोटकर ७ दिन तक सुर्य-ताप में रखें फिर गोला बना सुखाकर छोटी हांडी में रखें चारों ओर भांगरे का कल्क डालें फिर मुहं पर ढक्कन लगा कपड मिटटी कर गजपुट देवें | इस तरह ३ पूट देने से निश्चन्द्र उत्तम मुलायम लाल रंग कि भस्म बन जाती है यदयपि भस्म निश्चन्द्र हो जाती है परन्तु जब तक १०० पुट न दिये जाये तब तक विशेष गुणयुक्त नहीं होती है |

मात्रा और उपयोग –

पहले खण्ड में अभ्रक भस्म प्रकरण में लिखे अनुसार अभ्रक से बल बढाने के लिये सेवन करने वालों को चाहिये, कि सज्जीखार आदि क्षार अधिक नमक अम्ल व्दिदल धान्य चना, मसूर, उडद, अरहर, मटर, सेम आदि बेर, ककडी, करेला, बैगंन, करीर, कैर, और तैल का त्याग करें इनके अतिरिक्त अधिक मिर्च धूम्रपान शुष्क अन्न अधिक कब्ज करने वाले पदार्थ अति परिश्रम मानसिक चिन्ता और उपवास भी नही करने चाहिये | ब्रहमचर्य का जितना अधिक पालन हो उतना लाभ अधिक पहुचता है|

 

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