Spine Care

HOW PARIJATAK CAN CURE SLIPPED DISC /BACK PAIN / CERVICAL SPONDILITIS / SPINE ????

  • Aligning the spine in its real shape.
  • Strengthen Spinal Cord
  • Relaxing the muscles and body
  • Strengthen  surrounding muscles & Ligaments, tendons
  • Oleation of the spine & Vertebrea with inter vertebral spaces
  • Stability provided to Vertebral Column not to reoccurrence of the same

 

We have cured more than almost 6150 patients for slipped disc, some of them were in a very complicated status they were lost there sensation of urine & passing motion, even some were completely on bed and were not able to walk or move for few steps too. Those were relieved with complete Kerala Panchkarma & Ayurvedic  treatments and that too without any surgery , without any side effect. It is only possible by  all Ayurvedic way, through Ayurvedic Remedies,Kerala Panchkarma ( Kerala Oil Therapy with Kerala Staff ).

 

 

 

पीठ दर्द – Back Pain

‘कमर टुटना’  या पीठ दर्द – Back Pain  यह अब केवल मुहावरा न रहकर एक बडे पैमाने पर देखी जानेवाली बिमरी हो गयी है। यह दर्द केवल कमर तक सिमित नही है। आज की जीवनशैली, बैठ कर काम करने की पद्धती के कारण यह सहज रुप से दिखाई देनेवाली बिमारी हो गयी है। एक सर्वे से पता चला अहि कि ७पीठ दर्द - Back Pain in nagpur०% से ७५% लोग पीठ दर्द – Back Pain के शिकार है। और यह काफी गंभीर है। जीवन की भागदौड, तनावपूर्ण जीवनशैली, नि:सत्व आहार, शारिरीक व मानसिक तनाव के कारण पीठ दर्द – Back Pain काफी गंभीर हो गया है।

 

कोई वजनदार वस्तु उठा लेने से, अस्थि क्षय या कैल्शियम की कमी के कारण रीढ की हड्डी कमजोर होना, बचपन मे ही स्कुल बैग का पीठ पर भार, लगातार एक जगह बैठना, कुर्सी मे अधिकाधिक समय बैठना, कम्प्युटर पर ज्यादा समय तक काम करना, किसी भी वाहन से यात्रा करते समय रीढ की हड्डी को क्षति पहुँचना, पेट साफ न रहना, रात मे जागरण, चिंता, शोक, क्रोध इ. तथा उचित आहार-रस का सेवन न करने के कारण रीढ की हड्डी कमजोर होना, व्यायाम न करना, कुर्सी या अन्य जगह बैठने की शरीरस्थिती सही न होना इन कारणों से पीठ दर्द – Back Pain या कमर दर्द होता है।

सिर से निकलने वाली हजारों तंत्रिकाएं ( Nerves ) रीढ की हड्डी के छेद से होकर शरीर मे फैलती है ( Spinal Cord )। यही तंत्रिकाएं शरीर को संवेदना प्रदान कर सिर तक पहुँचाती है। अर्थात संपूर्ण शरीर को अनुभूति देने का काम रीढ की हड्डी से होता है।

पीठ दर्द - Back Pain in nagpur

इस के अलावा रीढ की हड्डी ( Vertebral Column ) संपूर्ण शरीर का आधार है। हमारा शरीर इसी के सहारे खडा है। इस के कारण पीठ दर्द – Back Pain या कमर दर्द बहुत गंभीर हो सकता है। पीठ दर्द – Back Pain कितना गंभीर हो सकता है यह आपको मेरे यहां आनेवाले रोगियों से पता चल सकता है। कई केसेस में से एक केस आपके सम्मुख प्रस्तुत है।

पीठ दर्द से पीडित, लगभग एक चालीस वर्ष की आयु के एक व्यक्ति मेरे पास आए थे। उनका पीठ दर्द – Back Pain इतना बढा हुआ था कि उनके लिए खडा रहना या बैठना, चलना बहुत मुश्किल था। उन्हे कार से उठाकर क्लिनिक मे लाया गया था। जांच के लिए वे लेट भी नही पा रहे थे।

उनकी रिढ की हड्डी मे काम्प्रेशन था, कमर मे भी बहुत दर्द था, झुनझुनी थी ( Tingling Sensation ) , पैरों मे अकडन ( Stiffness ) थी। जांच करने पर पाया गया कि रीढ की हड्डी के काम्प्रेशन के साथ साथ हड्डी भी स्वस्थान पर नही थी। एमआरआय करने पर डिस्क भी जगह से हिल गयी है यह दिखाई दिया ( Slipped Disc )। पेंट के कारखाने मे काम करनेवाले इस व्यक्ति को नोकरी पर जाना भी असंभव हो गया था। उन्होने एक लम्बी छुट्टी ले रखी थी।slipped disc -पीठ दर्द - Back Pain in nagpur

 

 

यह पीठ दर्द – Back Pain ठिक करने के लिए कम से कम डेढ महिने का उपचार आवश्यक होगा इसकी मैने उन्हे कल्पना दी। पहले सप्ताह मे साधा मसाज, अभ्यंगम और पोटली मसाज किया। मसाज करने हेतु नाडी के अनुसार विशिष्ट परिणामकारक तेल का प्रयोग किया गया। साथ ही नस्यम और बस्ती क्रिया भी की गयी। नस्यम के कारण तेल सिर मे जाकर विष द्रव्य बाहर पडते है। रीढ की हड्डी को स्थिरता व बल प्राप्त होता है। बस्ती से ‘वात’ कम होता है, इस कारण पीठ दर्द – Back Pain भी कम होता है। हड्डीयां मजबूत होती है तथा शरीर के विष द्रव्य पेट से बाहर निकलते है। पहले ही सप्ताह मे उस व्यक्ति के स्वास्थ्य मे २०% सुधार देखा गया।

दुसरे सप्ताह मे कटिबस्ती दी गयी। इस हेतु नाडी के अनुसार तेल बदल लिया गया। नस्यम व बस्ती जारी रखा।

तिसरे सप्ताह मे कटिबस्ती, नस्यम और बस्ती के साथ लेपन भी किया। अब तक उस व्यक्ति को ५५ से ६०% ठिक लग रहा था।

चौथे सप्ताह मे नस्यम व बस्ती के साथ पिडिचिल  किया। पिडिचिल  के लिए शरीर पर ४ लिटर बल्य तेल की धारा छोडकर मसाज किया गया।

पांचवे सप्ताह मे पोटली मसाज, नस्यम, बस्ती और पीठ मे बल लाने हेतु नवराकिडी चिकित्सा की गयीपीठ दर्द - Back Pain in nagpur

छठे सप्ताह मे कटीबस्ती, नस्यम, बस्ती, लेपन किया। इस अवधि मे उपचार का परिणाम होकर इस व्यक्ति को चलने-फिरने के लिए सहारे की आवश्यकता नही रही तथा झुनझुनी, भारीपन और अकडन नही रही।

उपचार के ४ दिन पश्चात वे नौकरी पर जाने लगे। इस उपचार के साथ व्यायाम व पेट से दवा का भी नियोजन किया गया था। हड्डियां स्वस्थान पर स्थापित करना, मसाज द्वारा विकृति ठिक करना, रीढ की हड्डी मजबूत करना, मांसपेशियों को स्थिरता प्रदान करना, बल देना, कशेरुकाओं को मजबूत करना, रीढ की हड्डी का पुनर्भरण करना आवश्यक था। इस सभी का विचार कर चिकित्सा योजना की गयी थी।

 

  • पीठ दर्द – Back Pain से ग्रस्त व्यक्ति सप्ताह मे एक बार आयुर्वेदिक मसाज कराएं,slipped disc - पीठ दर्द - Back Pain in nagpur
  • लगातार कुर्सी मे न बैठे, लगातार ४५ मिनट तक बैठने के पश्चात उठकर तोडा चले,
  • व्यायाम या योगासन करें,
  • पैदल चलने जाएं,
  • पीठ को झटका न बैठे इसका ध्यान रखे।
  • उचित समय पर डॉक्टर की सलाह ले। ऐसा करने पर पीठ दर्द बढेगा नही।

 

घरेलु नुस्खे

१) गरम पानी मे नमक मिलाकर उसमे टॉवेल भिगोकर, ठिक से पानी निचोड कर उससे पीठ सेके। तुरंत आराम पडता है।

२) रोज नारियल तेल या सरसो तेल मे ४-५ लहसून डालकर काले होने तक तेल गरम करें तथा उससे पीठ का हलका मालिश करें।

३)ओवा तवे पर हलकासा गरम करें ठंडा होने के पश्चात थोडा चबाकर निगल ले। नियमित सेवन से कमर की तकलिफ कम होती है।

४) नरम गद्दे पर न सोए।

 

पीठ दर्द होने परपीठ दर्द - Back Pain in nagpur

१) महायोगराज गुग्गुल की २-२ गोलियां तीन बार लेने की सलाह दी जाती है। इससे वात और कफ कम होने मे सहायता होती है।

२) सहचरादि कषाय टॅब्लेट २-२ गोलियां तीन बार खाना खाने से पूर्व।

३) पुनर्नवादी कषाय टॅब्लेट २-२ गोलियां तीन बार।प्रकृती बलाबल अनुसार दी जाती है। इससे क्षितिग्रस्त हिस्से की सूजन क्म होने मे सहायता होती है।

४) कॅल्सिप्लस टॅब्लेट – कॅल्शियम से हड्डीयां मजबूत होकर रीढ की हड्डी की मजबूती बढती है।

५) टॅब्लेट सर्विलॉन / सायटिलॉन / स्पाँडिलॉन / गंधतेल आवश्यकता अनुसार पेट से दिया जाता है। इससे पीठ की स्निग्धता बढती है।

६) पाचक योग के रुप मे दीपन-पाचन-रोचन करनेवाली (स्वाद बढानेवाली) औषधी दी जाती है। विशेष रुप से आमपाचक वटी, चित्रकादि वटी इस प्रकार की औषधि दी जाती है। साथ ही मांसपेशियों की और कंडरा की मजबूती बढाने वाले अश्वगंधारिष्ट, अमृतारिष्ट,

मृतसंजीवनी, बलारिष्ट, दशमुलारिष्ट, दशमुलजिरकारिष्ट आदि औषधियों का प्रयोग किया जाता है।

Back Pain – Cure Completly with some Ayurvedic Tips

The public in general , scientific , professional community, seems to be largely convienced with traditionality and possible scientific validity of the principles and approaches of Ayurveda as logical life sciences and as a healing modality. Traditional practices in ayurveda such as Panchkarma have become so popular that our Parijatak Kerala Ayurvedic Panchkarma Centre regularly report waiting lists for patients not only in India but also from abroad specially for Back Pain, slipped disc, paralysis, avoid knee replacement with rejuvnation , detoxification, weight loss.

Ayurveda is not merely a science but it is a science of life. We always focusing on indivisuals all problames not on disease which patient complant to sort out complete cure with cause & concerned factors that is Anshansh Kalpana . In states disease as a condition in which body and mind are subjected to pain and misery. The measures adopted to bring back equilibrium is called chikitsa .

Chikitsa types :Back Pain H2

Shodhana is a procedure which involves the elimination of vitiated doshas in a complete manner, and thus recurrence of diseases is avoided like back pain or any diseases. Shamana is the palliative treatment as it does not eliminate vitiated doshas but only subsides them in there own place called as shaman ,It is believed that there is no possibility of relapse of the disease cured by shodhana chikitsa, where as the diseases cured by shamana may recur, we are providing back pain specialisation in India

Panchkarma is a unique modality of treatment consists of vamana , virechana , anuvasana vasthi , niruha vasthi , nasya karma , raktamokshana . Out of the above five karmas, Vasthi is the most important constituent of panchkarma due to its multifocal effects. As per the physiology of Ayurveda , Vata is the main factor where as pitta & kapha are dependent on vata for their fuctions to be performed. ( पित्त पंगु कफ पंगु पंगवो मल धातव: )

Vasthi alleviates the morbid doshas and in addition to that, it nourishes the body tissues. It is considered as the best remedy for morbid vata as well as in some extent pitta & kapha also. Vyadhi pratyeneeka Medicines can be used in the form of basti to treat that particular vyadhi. This particular procedure cures diseases of all doshas of all the three margas namely, shakha, koshta and the marmasthi sandhi & it completely destroys the vitiated vata dosha by entering into its moolasthana ( roots of vata & bones is pakvashaya / large intestine ) which is responsible for all diseases, thus said to be ardha chikitsa in all specially in back pian.

 

 

 

 

Cervical Spondylosis – Neck Pain – cure complete by kerala Panchkarma

Life has become hectic. If we are not in rush we don’t feel it’s a week day. The today’s life biggest occupational hazard called as cervical spondylosis. Almost most of the working people’s are suffered from this. Go through complete details what exactly it is ?

Cervical spondylosis - PARIJATAK
Cervical spondylosis – PARIJATAK

You get so much indulged in your work activities that you don’t pay attention to your body aches or minor health problems. Actually these are the signals given by your body. The body keeps on suffering. The jerks and troubles, which is the outcome of your busy schedule affects your body ,,mainly it’s your neck and spine which pay the dues. As a result, you come across problems like dizziness. U suffer from problems like slipped disc ,neck pain. Pain radiate from one place to another with tingling etc, called as radiculopathy. Still you ignore the warnings, which your body gives you in the form of such symptoms. So talk to your body and you might notice that you suffer from such common problems. Viz: Neck pain, Cervical spondyloss, Slipped disc, Spinal cord compression.

Cervical spondylosis - PARIJATAK
Cervical spondylosis – PARIJATAK

If yes, relax. Read the case below. Understand the root cause of your problem and remedies available at Parijatak, First multi speciality Ayurvedic Hospital in Central India,

Where our expert treats you with Kerala Ayurvedic Panchkarma.

6 years back a 47-year-old lady patient came to consult me at Parijatak (one of the Best ayurvedic treatment center in Nagpur). She was suffering from dizziness it had reached to the extent that she was afraid to stand. She always needed someone along with her to support her if needed. That constant feeling of dizziness made her lose her confidence. She had come with her husband. She was suffering from a series of health issues. She felt abrupt numbness in her right hand, had severe backache and consistent neck pain .

Cervical spondylosis - PARIJATAK 1
Cervical spondylosis – PARIJATAK 2

I noticed that she had these problems since 5 years before she came to consult me. The brain CT scan, EEG, and all the tests were already done. The report was normal. However, the X-ray displayed that it was Cervical Spondylosis

I suggested her to get MRI done. Now the problem was clear. the 5th, 6th, 7 th position in the spine had sensed extra pressure. The buffer had got pressed. I planned and started the treatment accordingly.

Cervical spondylosis - PARIJATAK 1
Cervical spondylosis – PARIJATAK

The woman was clearly a patient of Cervical Spondylosis.

Cervical Spondylosis is a spinal degeneration or deformity of joints of two or more vertebrae, which occurs with aging. Cervical Spondylosis is the common degeneration of cervical spine that affects the vertebral bodies and inter-vertebral disks of the neck and the nerve roots or spinal cord of the spinal canal. Cervical Spondylosis often advances with age and increases at multiple interspaces. In ayurveda the condition is known as ˜Griva Sandhigata Vata.

Let’s know Causes of Cervical Spondylosis
Cervical spondylosis
Cervical spondylosis

Age – Cervical Spondylosis is often associated with age. While only less than 25% of people below 40 years of age experience Cervical Spondylosis, about 60% or more above the age of 40 are affected by it.

Neck injury “ A neck injury which may have occurred years back can predispose to Cervical Spondylosis. Other precipitating factors such as incorrect body posture, trauma, and excessive intake of sour food (according to ayurveda), can trigger Cervical Spondylosis attacks.

Genetics “ Although the role of genetics is yet to be confirmed, people with above 50 years of age who experience the condition, are more likely to have a sibling with normal or mild conditions of Cervical Spondylosis.

Work Activity “ Cervical Spondylosis is often found among people who carry heavy loads on their head or shoulders, than those who do not.

Symptoms of Cervical Spondylosis

Cervical spondylosis
Cervical spondylosis

Common symptoms include pain in the neck which later radiates to arms or shoulder, weakness on the legs and arms, stiffness in the neck region, numbness of arms, legs or shoulders, loss of balance, headaches (on the back of the head), muscle spasms, loss of control over bladder or bowel movements, and general tiredness anxiety.

Treatment given at Parijatak (one of the Best ayurvedic treatment centre in Nagpur and central India)

I, Dr. Nitesh Khonde , Consultant and physician Kerala Ayurvedic Panchkarma have treated hundreds of patients of Cervical Spondylosis. Parijatak applies Kerala Ayurveda and Oil Therapy

Which produces awesome results.

Cervical spondylosis - PARIJATAK 1
Cervical spondylosis – PARIJATAK 1

I explained the lady patient that she needed a 1 and half month kerala panchakarma treatment and she has to consume ayurvedic medicine for minimum 3 months.

In the first week I started with abhyangama and swedanam. I Started with greeva basti. Selected oil therapy according to her nadidosha (pulse problem).,appended the treatment with nasyam and basti . It helped increase the snigdhata. (oiliness)

This helped in reducing swelling over her neck. Nasya removed the unwanted wishdravya . (poisonous elements), basti removed the vaata in the body , resulted into Increased bone strength.

In the next week the medicine was continuously n vigorously poured over the neck. Then A medicinal pack was applied on it. Nasyam and basti was continued. The spine was now healthy and strong due to neck massage. The flexibility of the spine was increased .

In the third week, the potali massage therapy was applied. It helped stop the pain and bridge the gap in the spine. It increased the blood circulation. The spine was now fit and fine.

Cervical spondylosis
Cervical spondylosis

In the fourth week greeva basti was repeated. Nasyam and basti was continued.

Navarakidi was done in the fifth week.

The proper diagnosis and plan of action worked very well and the treatment was successful. There was no numbness in her fingures any more. The abrupt cramps occurring in the neck were vanished. The medicines and application of Kerala Ayurveda and Oil Therapy

resulted into strong bones and flexible healthy spine, the pain was gone.

Today, She is fully cured and fine. She visits every three months for regular check up.

I request you to understand the messaged your spine gives you in the form of neckpain. Take precautions. Still if you feel the pain ,consult the expert in time and get it treated right away. Parijatak wishes you a healthy life.

 

मानेच्या मणक्याचे आजार व खात्रीपूर्वक रामबाण उपचार – चक्कर, हाताला मुंग्या, शक्ती कमी, बधीरपणा, चमक, मान दुखणे, अकडणे इ. सगळी लक्षणे असतात

आपले आयुष्य इतके धावपळीचे झाले आहे की धावपळ नसेल त्या दिवशी अजून दिवस सुरु व्हायचा आहे की काय अशी शंका यावी. अपणही या धावपळीत इतके बुडून गेलेलो असतो की त्याचा आपल्याला नेमका काय त्रास होतो आहे याकडॆ लक्षच नसतं आपलं. या सगळ्यात आपलं शरीर काय सोसत असतं याकडे पूर्ण दुर्लक्ष होतं. सगळ्यात जास्त धक्के सहन करावे लागतात आपल्या मानेला, मणक्याला (cervical spondylosis) . परिणामस्वरुप चक्कर वगैरे पण येतात. पण आपण लक्षच देत नाही!

cervical-spondylosis
cervical-spondylosis

 

६-७ वर्षांपूर्वी सधारण ४७ वर्षांची एक महिला माझ्याकडे पारिजातक केरला आयुर्वेदिक मध्ये आली होती. तिला कोणीतरी सम्बधीताने माझ्याबद्दल सुचविले होते, ती माझ्याकडे आली तेव्हा तिला खूप चक्कर येत होते. उभे राहणे अशक्य वाटत होते. उभे राहिल्यास पडण्याची भीती त्यांना वाटत होती. सतत कोणाची तरी सोबत असावी असे वाटत होते. ती महिला पतीसोबतच आली होती. उजव्या हाताला मुंग्या येतात, चमक निघते, उजव्या हाताच्या बोटांत बधिरपणा आलाय, पाठ दुखते, मान दुखते अशी त्यांची तक्रार होती. सोबतच उजव्या हातामध्ये कमजोरी आलेली होती. सगळी लक्षणे cervical spondylosis ची होती.

 

cervical spondylosis
cervical spondylosis

तरीपण विचारपूस केली असता कळले की माझ्याकडे येण्यापूर्वी ४-५ वर्षांपूर्वीपासून त्यांन असा त्रास होत होता. मेंदूचे सीटी स्कॅन, ईईजी अशा सगळ्या चाचण्या करुन झाल्या होत्या. सगळे रिपोर्ट नॉर्मल होते. एक्स-रे मध्ये मात्र त्यांना मानेचा स्पॉन्डिलायटिस ( cervical spondylosis ) असल्याचे दिसत होते.  म्हणून मी त्यांना एमआरआय करण्याचे सुचवले. त्यामध्ये पाठीच्या ५-६-७ या मणक्यात दाब असल्याचे आणि ५व्या-६व्या मणक्यातील गादीही खूप दबलेली दिसत होती. यावरून त्या महिलेला सर्व्हायकल स्पॉन्डिलायटिस ( Cervical Spondylosis / Slipped Disc )असल्याचे स्पष्ट झाले त्यातील योग्य बारकावे कळले कोठे दाब निर्माण झाला व कोणता मणका किती प्रमाणात दबला व त्याचा चेतासंस्ठेवर्ती काय परिणाम झाला याची पूर्ण कल्पना आली. मग त्यानुसार उपचार सुरु केले.

 

 

cervical-spondylosis
cervical-spondylosis

एक दिड महिना केरळीय पंचकर्म आणि त्याबरोबर तीन महिने औषध घ्यावे लागेल हे त्यांना समजावून सांगितले. पहिल्या आठवड्यात अभ्यंगम आणि स्वेदन केले. सोअबत ग्रीवा बस्ती सुरु केली. कि जेणेकरून  cervical spondylosis वरती लवकरात लवकर विजय मिळविता येईल. नाडी व दोषानुसार तेल निवडले. ग्रीवा बस्तीसोबत नस्यम व बस्ती पण दिली. ग्रीवा बस्तीमुळे तेथील स्निग्धता वाढली, मानेवरील सूज कमी होण्यास मदत झाली. नस्यममुळे डोक्यातील विषद्रव्य बाहेर काढण्यास सहाय्य झाले. पोटात बस्ती दिल्यामुळे शरीरातील वात कमी करता आला व हाडांची मजबुती वाढवता आली. व cervical spondylosis मध्ये पहिल्याच आठवड्यात फरक जाणवू लागला.

दुसर्‍या आठवड्यात मानेवर औषधी द्रव्यांची धार सोडली. मानेला काही औषधांचा लेप दिला. नस्यम व बस्ती सुरु ठेवले. औषधी द्रव्यांच्या धारेमुळे व तिथे केलेल्या मसाजमुळे मणके स्वस्थ व मजबूत झाले. त्या मणक्यातील लवचिकता व स्निग्धता वाढली. त्याचप्रकारे cervical spondylosis मधील सूज कमी झाली.

तिसर्‍या आठवड्यात, पोटली मसाज केले.  राहिलेले सगळे दुखणे व मणक्याती गॅप पोटली मसाजने भरुन काढली. तेथील रक्ताभिसरण वाढले. मणके स्वस्थानी बसले व cervical spondylosis मुळे निर्माण झालेला मनक्यावरील दाब कमी झाला.

चौथ्या आठवड्यात पुन्हा ग्रीवा बस्ती केली व सोबतच नस्यम व बस्ती पण केले. पाचव्या आठवड्यात नवराकिडी केले.cervical-spondylosis

या सर्व चिकित्सेमुळे त्यांच्या बोटांतील  बधिरपणा निघून गेला.  हाततील मुंग्या, चमक व मानेचे दुखणे बंद झाले. यासोबतच अभ्यांतर औषधांची रचना करताना, मानेची लवचिकता, स्निग्धता वाढेल, हाडांची मजबूती वाढेल सोबतच दीपन, पाचन वाढेल व मन्यागत वात कमी करेल अशी औषधी रचना केली कि जेणेकरून cervical spondylosis पूर्णपणे बरा झाला.

आज त्या पूर्णपणे बर्‍या आहेत. तीन महिन्यातून एकदा तपासणीसाठी येतात. आपली आपण काळजी घ्यावी म्हणून. पण बरे झाल्यापासून त्यांना आतापर्यंत काहीही त्रास झालेला नाही.

‘कंबर मोडणे’ हा आता वाक्प्रचार न राहता मोठ्या प्रमाणावर आढळणारा पाठदुखी ( back pain / slipped disc ) आजाslipped discर झाला आहे. हे दुखणे फक्त कंबरेपुरते सीमित नाही. त्याचा विस्तार होऊन आजची जीवनशैली आणि कामाचे बैठे स्वरुप यामुळे पाठदुखी ( back pain / slipped disc ) हा एक सहज आढळणारा आजार झाला आहे. सर्वेक्षण केले तर ६० ते ७०% लोकांना पाठदुखी ( back pain / slipped disc )चा त्रास असल्याचे आढळेल. आणि या पाठदुखीचे ( back pain / slipped disc ) स्वरुपही गंभीर आहे. पाठदुखी ( back pain / slipped disc )jकिती गंभीर असू शकते हे तुम्हाला माझ्याकडे आलेल्या या रुग्णावरुन लक्षात येईल.
slipped disc             पाठदुखीने ( back pain / slipped disc ) त्रस्त, साधारण चाळीस एक वर्षांचे गृहस्थ माझ्याकडे आले होते. त्यांचे दुखणे इतके बळावले होते की ते उभे राहू शकत नव्हते, चालू शकत नव्हते की बसू शकत नव्हते. त्यांना कारमधून उचलून क्लिनिकमध्ये आणावे लागले होते. तपासणी करण्यासाठी ते झोपूही शकत नव्हते. त्यांच्या मणक्यात कॉम्प्रेशन होते, कंबरही खूप दुखत होती. मुंग्या येत होत्या, पाय जड झाले होते, पायात गोळे येत होते. तपासणी केल्यावर मणक्यातील कॉम्प्रेशनबरोबर हाडेही स्वस्थानी नव्हती.

SPINEएमआरआय केल्यावर डिस्कही जागेवरुन हालली असल्याचे लक्षात आले. पेंटच्या कारखान्यात काम करणार्‍या या गृहस्थांना नोकरीवर जाणे अशक्यच झाले होते.

त्यांनी मोठी रजाच घेतली.
हे दुखणे बरे करण्यासाठी दिड महिन्याचा उपचार करणे आवश्यक असल्याचे त्यांना समजावून सांगितले.

 

slipped disc

 

 

 

 

 

 

 

 

 

पहिल्या आठवड्यात साधे मसाज, अभ्यंगम आणि पोटली मसाज केले. मसाज करण्यासाठी नाडीनुसार विशिष्ट परिणामकारक तेल वापरले. slipped disc याबरोबरच नस्यम व बस्ती क्रियाही केली. नस्यममुळे नाकातून डोक्यात तेल जाऊन विषद्रव्य विरल होऊन बाहेर पडतात. मेरुरज्जुला स्थिरता व बल मिळते. तर बस्तीने वात कमी करते, त्यामुळे दुखणे कमी होते. हाडे मजबूत होतात आणि शरीरातील विषद्रव्य पोटातून बाहेर पडतात. पहिल्याच आठवड्यात त्या गृहस्थांमध्ये २०% पाठदुखी ( back pain / slipped disc ) सुधारणा दिसली. slipped disc

दुसर्‍या आठवड्यात कटीबस्ती दिली. यासाठी नाडीनुसार तेल बदलून वापरले. नस्यम आणि बस्ती सुरुच ठेवले.

तिसर्‍या आठवड्यात कटीबस्ती, नस्यम आणि बस्तीबरोबर लेपन केले. या वेळेपर्यंत त्या गृहस्थांना ५५ ते ६०% पाठदुखी ( back pain / slipped disc ) बरे वाटू लागले होते असे म्हणायला हरकत नाही.

slipped disc  चौथ्या आठवड्यात नस्यम व बस्तीच्या जोडीने पिडिचिन केले. पिडिचिनमध्ये ४ लिटर बल्यतेल शरीरावर सोडले व मसाज केले.

पाचव्या अठवड्यात पोटली मसाज, नस्यम, बस्ती आणि पाठीत बळ आणाण्यासाठी नवराकिडी चिकित्सा केली.

सहाव्या आठवड्यात कटीबस्ती, नस्यम, बस्ती, लेपन केले. या अवधीत उपचाराचा परिणाम होऊन त्या गृहस्थांना चालण्या-फिरण्यासाठी आधाराची गरज उरली नाही. मुंग्या येणे, जडपणा, गोळे येणे नाहिसे झाले.

 

slipped discया उपचारानंतर ४ दिवस विश्रांती घेऊन ते नोकरीवर पुन्हा रुजू झाले. यामध्ये उपचारांच्या जोडीला व्यायाम आणि पोटातून औषधांचीही योजना केली होती. हाडे स्वस्थानी, पूर्वस्थितीत आणणे, मसाज करुन विकृति बर्‍या करणे, मांसपेशी, स्नायुंना स्थैर्य देणे, बल देणे, मेरुरज्जु मजबूत करणे, कशेरुकांना मजबूत करणे, पूर्वस्थितीत आणणे, पाठीच्या मणक्याची झीज भरुन काढणे गरजेचे होते. या सगळ्याचा विचार करुनच उपचार-योजना केली होती.

slipped disc

 

एरवीही पाठदुखीचा ( back pain / slipped disc ) त्रास असणार्‍यांनी आठवड्यातून एकदा मसाज करावा, सतत खुर्चीत बसू नये, ४५ मिनिटे झाले की बैठक मोडावी. व्यायाम , योगासने करावी, पायी फिरायला जावे, शतपावली करावी, पाठीला झटका बसणार नाही याची काळजी घ्यावी. योग्य वेळी डॉक्टरांचा सल्ला घ्यावा. असे केल्यास पाठदुखी बळावणार नाही हे नक्की.

 

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